नए लेबर नियम लागू: मजदूरों के अधिकार और कंपनियों की जिम्मेदारी पर बड़ा असर

Nov 25, 2025 - 10:33
Nov 25, 2025 - 10:37
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नए लेबर नियम लागू: मजदूरों के अधिकार और कंपनियों की जिम्मेदारी पर बड़ा असर

National News: केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए नए लेबर कोड (Labour Codes) को लागू करने की तैयारी तेज होने के बाद देशभर में मजदूरों, कर्मचारियों और औद्योगिक इकाइयों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। नए नियमों के लागू होने के बाद काम के घंटे, वेतन संरचना, छुट्टियाँ और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई बड़े बदलाव सामने आएंगे।

काम के घंटे बढ़ेंगे, लेकिन सुरक्षा और ओवरटाइम का दायरा भी मजबूत

नए लेबर कोड के तहत कंपनियां कर्मचारियों से एक दिन में 12 घंटे तक काम ले सकेंगी, लेकिन साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे से अधिक नहीं होगा। यानी 3 या 4 दिन का कार्य सप्ताह भी संभव होगा।

विशेष बात यह है कि ओवरटाइम की सीमा 50 घंटे से बढ़ाकर 125 घंटे प्रतिमाह तक निर्धारित की जा सकती है।

सैलरी संरचना में बदलाव: हाथ में कम, PF में ज्यादा

नए वेतन नियम के अनुसार किसी भी कर्मचारी की सैलरी में बेसिक पे 50% से कम नहीं हो सकता। इससे कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी होगी, लेकिन हाथ में मिलने वाला इन-हैंड सैलरी थोड़ा कम हो सकता है।

छुट्टियों के नियम भी बदलेंगे

नए नियमों में सालाना छुट्टियों की गणना और कैरी फॉरवर्ड की सीमा को भी बदला गया है।

साल में 180 दिन काम करने पर कर्मचारी छुट्टी के पात्र बन जाएंगे।

कैरी फॉरवर्ड लिमिट बढ़ाई जा सकती है।

मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा पर जोर

गिग वर्कर्स, ठेका मजदूर और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को लेकर सरकार ने पहली बार एक बड़ा कदम उठाया है।

सामाजिक सुरक्षा कोड के तहत सभी श्रमिकों को PF, ESIC, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाओं के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्लैटफॉर्म वर्कर्स (डिलीवरी बॉय, ड्राइवर, ऐप-बेस्ड कर्मचारी) को भी सुरक्षा मिलेगी।

छोटे उद्योगों को मिलेगी राहत

Industrial Relations Code के तहत

300 कर्मचारियों तक की फैक्ट्रियां बिना सरकारी अनुमति के छंटनी और बंदी का निर्णय ले सकेंगी।

इससे MSME सेक्टर में रोजगार और निवेश बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या असर पड़ेगा?

नए लेबर नियमों के लागू होने से कर्मचारियों को दीर्घकालिक लाभ बढ़ेंगे

कंपनियों की अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी

असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों को सुरक्षा मिलेगी

लेकिन काम के घंटे और इन-हैंड सैलरी में बदलाव को लेकर कर्मचारी नाराजगी भी देखी जा रही है।

निष्कर्ष

नए लेबर कोड भारत के श्रम कानूनों में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। यह तय करेगा कि आने वाले समय में कर्मचारियों को कितनी सुरक्षा मिलेगी और कंपनियों का परिचालन कितना आसान होगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि यह नियम कब पूरी तरह लागू होते हैं और जमीनी स्तर पर इनका असर कैसा दिखाई देता है।