मधुपुर की रंजित यादव की चाय दुकान: रेड क्रॉस के बगल से सफलता की कहानी
मधुपुर: कहते हैं कि मेहनत और स्वाद मिल जाए तो छोटी सी चाय की दुकान भी बड़ी पहचान बन जाती है।
मधुपुर की रंजित यादव की चाय दुकान, जो रेड क्रॉस भवन के ठीक बगल में स्थित है, इसकी जीती-जागती मिसाल है। मंत्री और बड़े बड़े नेता सहित टॉप क्लास बिज़नेस मेन, शहर के पत्रकार, बुद्धिजीवी और गणमान्य भी चाय की चुस्की लेने यहां आते हैं। शाम होते ही चारपहिया वाहन लगनी शुरू हो जाती है और करीब रात्रि 10 - 11 बजे तक लोगों का आना जाना लगा रहता है।
रेड क्रॉस के बगल में शुरू हुई एक साधारण शुरुआत
करीब 10–12 साल पहले, रंजित यादव ने रेड क्रॉस के बगल में, सड़क किनारे एक छोटी सी चाय की दुकान शुरू की थी , और शुरुआत में—
- साधारण ठेला
- सीमित संसाधन
- दिन में मात्र 50–60 कप चाय
- लेकिन रंजित यादव के पास थी
- मेहनत, धैर्य और स्वाद पर पकड़
☕ स्वाद बना पहचान, पहचान बना ब्रांड
रंजित यादव ने कभी चाय की क्वालिटी से समझौता नहीं किया—
- शुद्ध दूध
- सही मात्रा में चाय पत्ती
- रेड क्रॉस, अस्पताल, बाजार और राहगीरों के बीच जल्द ही उनकी चाय की चर्चा फैल गई।
आज हालात यह हैं कि—
सुबह और शाम रेड क्रॉस के बगल में रंजित यादव की चाय दुकान पर भारी भीड़ रहती है।
चाय से लाख के करीब मासिक कारोबार
स्थानीय लोगों के अनुसार—
- रोज़ाना 800–1200 कप चाय की बिक्री
- प्रति कप ₹05–₹10
- साथ में बिस्कुट, टोस्ट, सिगरेट
➡️ अनुमानित मासिक टर्नओवर: ₹1 से 1.5 लाख
➡️ खर्च निकालकर ₹60–80 हजार तक की शुद्ध कमाई यह सब—
- बिना बड़ी दुकान
- बिना महंगे प्रचार
- सिर्फ भरोसे और स्वाद से
👥 दुकान नहीं, मधुपुर की चौपाल
आज रंजित यादव की चाय दुकान—
- कर्मचारियों की सुबह की शुरुआत
- मजदूरों की शाम की राहत
- छात्रों और आम लोगों की चर्चा का केंद्र बन चुकी है।
- रेड क्रॉस के पास होने के कारण यह जगह हर वर्ग के लोगों की अपनी जगह बन गई है।
🔑 रंजित यादव की चाय दुकान से सीख
✔ छोटा काम, लेकिन निरंतरता जरूरी
✔ सही लोकेशन और बेहतरीन स्वाद
✔ दिखावे से नहीं, भरोसे से ब्रांड बनता है
✔ ग्राहक नहीं, रिश्ते बनाइए
रेड क्रॉस के बगल में स्थित रंजित यादव की चाय दुकान मधुपुर के युवाओं के लिए संदेश है—
अगर इरादे मजबूत हों, तो सड़क किनारे की चाय भी लाखों की पहचान बन सकती है।

