झारखंड पर्यटन व ऊर्जा विभाग घोटाला: 116 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में ED ने मनी-लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया

Jan 25, 2026 - 13:01
Jan 25, 2026 - 13:14
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झारखंड पर्यटन व ऊर्जा विभाग घोटाला: 116 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में ED ने मनी-लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया

रांची झारखंड: राज्य में पर्यटन विकास निगम (JTDC) और ऊर्जा निगम से जुड़े लगभग 109 से 116 करोड़ रुपये के फर्जी तरीके से निकासी के बहुचर्चित घोटाले में अब मामला CID जांच से आगे बढ़कर ED की कार्रवाई तक पहुंच गया है। इस घोटाले में भ्रष्टाचार, बैंकिंग धोखाधड़ी और अब मनी-लॉन्ड्रिंग की गहन जांच जारी है।

घोटाले की शुरुआत और CID जांच

यह मामला वर्ष 2024-25 में सामने आया था, जब JTDC व ऊर्जा निगम के सरकारी खातों से बड़ी राशि का फर्जी तरीके से निकासी की गई। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज़ और प्रक्रियाओं का उपयोग कर सरकारी धन को अपने पक्ष में किया। CID (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) ने इस पर विशेष जांच टीम (SIT) गठित की और मामले की जांच शुरू की।

CID ने अब तक इस घोटाले में पांच चार्जशीट दाखिल कर दी हैं और कई आरोपियों के खिलाफ धारा लागू की है।

मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी

घोटाले में शामिल प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं: 

  • कुशल बनर्जी / अमित मुखर्जी – मुख्य आरोपी, कोलकाता से गिरफ्तार।
  • गिरजा प्रसाद सिंह – तत्कालीन JTDC कैशियर।
  • अमरजीत कुमार – बैंक मैनेजर।
  • लोलस लकड़ा, श्वेता भगत, लोकेश्वर साह, रोशन कुमार चतुर्वेदी, अमन शिर्सवाल, समीर कुमार व अन्य बिचौलिये व सहयोगी।

इन सभी आरोपियों को न्यायालय ने न्यायिक हिरासत में भेजा है और पूछताछ जारी है।

ED ने दर्ज किया मनी-लॉन्ड्रिंग (PMLA) केस

CID की जांच के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब इस मामले में मनी-लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) का केस दर्ज कर लिया है। ED ने पीएमएलए एक्ट के तहत यह केस ECIR-1/2026 के रूप में दर्ज किया है, क्योंकि जांच में यह संकेत मिला कि आरोपियों ने फर्जीवाड़े से निकाले गए धन को वैध दिखाने के प्रयास किए थे।

ED को इसके लिए पीएमएलए कोर्ट से अनुमति भी मिल चुकी है, और अब एजेंसी जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ कर रही है तथा मनी-लॉन्ड्रिंग के अन्य पहलुओं की जांच आगे बढ़ा रही है।

घोटाले का पैनापन

घोटाले की जांच में सामने आया है कि अलग-अलग सरकारी खातों से कुल मिलाकर:

  • JTDC से लगभग 10.40 करोड़ रुपये,
  • बिजली/ऊर्जा विभाग और अन्य से करीब 106 करोड़ रुपये की निकासी की गई थी।
  • जांच के दस्तावेज़ों में यह भी उल्लेख है कि यह सुनियोजित साजिश थी, जिसमें सरकारी प्रणाली का दुरुपयोग किया गया।

न्यायिक प्रक्रिया और आगे का रास्ता

अभी मुकदमे की सुनवाई जारी है और कोर्ट ने आरोप तय करने व सबूतों की जांच के लिए आगे की तारीखें निर्धारित की हैं। ED की मनी-लॉन्ड्रिंग जांच से संभव है कि इस घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आएं और मामले का दायरा और बढ़े।

राजनीतिक व प्रशासनिक प्रभाव

इस बड़े घोटाले ने झारखंड सरकार की आर्थिक निगरानी व वित्तीय नियंत्रण तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों और जनता के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई व जवाबदेही की मांग तेज़ हो गई है।