मधुपुर शहर में सरकारी करोड़ों की ज़मीन पर गड़बड़ झाला एवं जबरदस्ती घेरा बंधी शुरू

घटना के अनुसार, शहर के मधुपुर में खोवाड़ स्थित शील कोठी नाम से प्रचलित प्लॉट की मूल लीज अवधि समाप्त हो चुकी है , परन्तु वर्तमान में पंजीकृत दस्तावेजों में वह जमीन किसी एक महिला  के नाम पर कर दी गई है।  लीज ख़तम होने के बाद ये ज़मीन सरकार की हो जानी चाहिए थी, स्थानीय निवासियों और साथ ही एक मूल रैयत भूमि-हकदारों ने इस घेरा बंधी को अवैध बताते हुए शिकायत की है।

Nov 6, 2025 - 16:26
Jan 22, 2026 - 17:35
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मधुपुर शहर में सरकारी करोड़ों की ज़मीन पर गड़बड़ झाला एवं जबरदस्ती घेरा बंधी शुरू
यह तस्वीर ली गई है

06 नवंबर 2025 (Madhupur): करोड़ों की एक बड़ी ज़मीन-कानूनी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है जिसमें बताया गया है कि किसी पार्सल लीज समाप्ति के बाद भी उस ज़मीन की रजिस्ट्री कर दी गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों ने आपत्तिजनक रजिस्ट्री रद्द कराने और जांच शुरू करने की बात कही है।

घटना के अनुसार, शहर के मधुपुर में खोवाड़ स्थित शील कोठी नाम से प्रचलित प्लॉट की मूल लीज अवधि समाप्त हो चुकी है , परन्तु वर्तमान में पंजीकृत दस्तावेजों में वह जमीन किसी एक महिला  के नाम पर कर दी गई है।  लीज ख़तम होने के बाद ये ज़मीन सरकार की हो जानी चाहिए थी, स्थानीय निवासियों और साथ ही एक मूल रैयत भूमि-हकदारों ने इस घेरा बंधी को अवैध बताते हुए शिकायत की है।

क्या हुआ — संक्षेप में

  • लीज की अवधि समाप्त होने के बाद भी जमीन अवैद्य तरीके से रजिस्ट्री कर दी गई।

  • रजिस्ट्रेशन के दस्तावेजों में संश्मयास्पद प्रविष्टियाँ और गलत नियम संगत मिले हैं।

  • इस ज़मीन के बारे में एक DCLR ने बताया है की गलत तरीके से ज़मीन को रजिस्ट्री किया गया है।

  • वही कुछ लोगों का कहना है ये ज़मीन दलित का है जो शहर के भूमाफिया का पैनी नज़र है। 

प्रशासन की प्रतिक्रिया

राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमने मामले की प्रारम्भिक जाँच शुरू कर दी है। अगर रजिस्ट्री अवैध पाई जाती है तो उसे रद्द कराने की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जो भी अपराधी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”
संबंधित अधिकारियों ने बताया कि रजिस्ट्री के मूल दस्तावेजों और निबंधन की प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है तथा आवश्यक होने पर अभियोजन संबंधी कदम भी उठाए जाएंगे। वही एक पक्ष का कहना है न्यायालय में मामला दर्ज है उसके बाद भी अधिकारीयों की मिली भगत से ज़मीन की घेरा बंदी की जा रही है। 

कानूनी पहलू

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, लीज समाप्ति के बाद की गई किसी भी बिक्री या रजिस्ट्री का कोई वैध प्रभाव नहीं माना जाएगा और वह रद हो सकती है। यदि धोखाधड़ी या जालसाज़ी का पता चलता है, तो संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर एफआईआर भी की जा सकती है। पीड़ित पक्ष न्यायालय में रजिस्ट्री रद्द कराने की याचिका दायर कर सकता है।

प्रभावित पक्ष की प्रतिक्रिया

आसपास के निवासी व कुछ दावेदारों ने चिंता जताई है कि अवैध रजिस्ट्री से स्थानीय आवासीय व वाणिज्यिक योजनाओं पर असर पड़ सकता है। एक दावेदार ने कहा, “यह जमीन हमारी लीज के अनुसार प्राधिकरण की है; किसी को इसका अधिकार नहीं बनना चाहिए।”  वही कुछ लोग PIL करने की तैयारी कर रहें हैं, लोगों का कहना हैं ये ज़मीन मूलतः सरकार की होनी चाहिए।