झारखंड में फायर सेफ्टी में बढ़ता भ्रष्टाचार: लोगों की जान जोखिम में, सिस्टम पर सवाल

Nov 24, 2025 - 03:11
Nov 24, 2025 - 09:21
 0
झारखंड में फायर सेफ्टी में बढ़ता भ्रष्टाचार: लोगों की जान जोखिम में, सिस्टम पर सवाल
AI के द्वारा बनाई गई तस्वीर

Jharkhand News: झारखंड में फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। राजधानी रांची से लेकर देवघर, धनबाद, बोकारो, मधुपुर और राज्य के अन्य शहरों में कई व्यावसायिक भवन, होटल, हॉस्टल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट बिना मानक फायर सेफ्टी उपकरणों के संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद कई संस्थानों को फायर सेफ्टी NOC (No Objection Certificate) मिल जाता है—जो भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है।

फायर सेफ्टी मानकों की खुलेआम धज्जियां

कई भवनों में फायर अलार्म सिस्टम, फायर कंट्रोल पैनल, इमरजेंसी एग्जिट, हाइड्रेंट सिस्टम, और फायर एक्सटिंग्विशर तक नहीं हैं।

पुराने होटल और बाजारों में वायरिंग की स्थिति इतनी खराब है कि किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

कई बिल्डरों ने नक्शा पास कराने के दौरान फायर प्लान तो लगाया, लेकिन निर्माण के समय उसे लागू ही नहीं किया।

NOC जारी करने में महाजाल

स्थानीय स्तर पर फायर विभाग में दलालों और अधिकारियों की मिलीभगत से बिना निरीक्षण किए ही NOC जारी करने का आरोप कई जगहों पर सामने आया है। सूत्रों के अनुसार—

  • निरीक्षण की औपचारिकता कागज पर पूरी कर दी जाती है।
  • कई जगह नकद लेकर फर्जी रिपोर्ट तैयार की जाती है।
  • भ्रष्टाचार के कारण असुरक्षित भवनों को “फायर सेफ” घोषित कर दिया जाता है।

जनता की सुरक्षा खतरे में

पिछले कुछ वर्षों में झारखंड में कई अग्निकांडों में कई जानें जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि—

 “अगर फायर सेफ्टी मानकों का सही पालन होता और विभाग ईमानदारी से काम करता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।”

कानून है, लेकिन पालन शून्य

फायर सेफ्टी एक्ट और नेशनल बिल्डिंग कोड के तहत हर व्यावसायिक और ऊँची इमारत में फायर सेफ्टी अनिवार्य है, लेकिन—

  • नियम केवल कागज पर लागू
  • निरीक्षण सालों तक नहीं होता
  • भवन मालिक नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं

समाधान क्या है?

1. NOC प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना।

2. फिजिकल निरीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करना।

3. भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और विभागीय जांच।

4. बिना फायर सेफ्टी वाले भवनों पर भारी जुर्माना और सीलिंग की कार्रवाई।

5. जनता को फायर सेफ्टी के प्रति जागरूक करना।

निष्कर्ष

झारखंड में फायर सेफ्टी से जुड़े भ्रष्टाचार ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि आम जनता की जान को भी जोखिम में डाल दिया है। यदि सरकार और विभाग कठोर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो भविष्य में बड़े अग्निकांडों से इंकार नहीं किया जा सकता।