अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने और संचालन से जुड़ी अनिवार्य नियमावली, उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई
Bulletin Page Desk: स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ अल्ट्रासाउंड सेंटरों की मांग तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन इससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया और अनिवार्य नियमों का पालन हर संचालक के लिए आवश्यक है। सरकार ने पीसी-पीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड केंद्रों को खोलने, पंजीकरण कराने और नियमित संचालन के लिए कड़े दिशानिर्देश तय किए हैं। इन नियमों का मकसद भ्रूण लिंग जांच पर रोक और पारदर्शी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
केंद्र खोलने से पहले अनिवार्य नियम
1. PCPNDT एक्ट के तहत पंजीकरण अनिवार्य
- बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी अल्ट्रासाउंड मशीन या सेंटर संचालित करना गैरकानूनी।
- जिला उपयुक्त प्राधिकारी (CMO/CS) से अनुमति लेनी होती है।
- आवेदन में मशीन की डिटेल, सेंटर की लोकेशन व डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट की योग्यता अनिवार्य रूप से शामिल होती है।
2. योग्य रेडियोलॉजिस्ट/डॉक्टर की नियुक्ति
- सेंटर में MBBS के साथ रेडियोलॉजी में डिग्री/डिप्लोमा रखने वाले चिकित्सक की उपस्थिति अनिवार्य।
- ‘नाममात्र’ रेडियोलॉजिस्ट दिखाकर टेक्नीशियन के भरोसे केंद्र चलाना कानूनन अपराध।
3. मशीन और उपकरणों की वैध जानकारी
- मशीन का मॉडल, सीरियल नंबर, खरीद बिल की कॉपी रजिस्ट्रेशन में देना होता है।
- किसी भी प्रकार की पोर्टेबल यूनिट के लिए विशेष अनुमति आवश्यक।
- संचालन के दौरान पालन किए जाने वाले कड़े नियम
4. फॉर्म–F भरना अनिवार्य
- हर मरीज की जानकारी फॉर्म-F में दर्ज करना जरूरी।
- फॉर्म में त्रुटि या गायब जानकारी को PCPNDT एक्ट का उल्लंघन माना जाता है।
5. लिंग निर्धारण पर पूर्ण प्रतिबंध
- भ्रूण का लिंग बताना दंडनीय अपराध है।
- दोषी पाए जाने पर केंद्र की सीलिंग, लाइसेंस निलंबन और जेल तक की सजा का प्रावधान।
6. रिकॉर्ड 2–5 वर्ष तक सुरक्षित रखना
रिपोर्ट, फॉर्म-F, रजिस्टर, मशीन लॉगबुक आदि को कम से कम 2–5 वर्ष तक संरक्षित रखना अनिवार्य।
7. अनिवार्य डिस्प्ले बोर्ड
केंद्र में निम्न जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना जरूरी:
- लिंग जांच प्रतिबंधित है।
- PCPNDT एक्ट की धारा और दंड विवरण।
- डॉक्टर/रेडियोलॉजिस्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर और प्रमाण पत्र।
8. मासिक रिपोर्टिंग
- हर महीने की गतिविधियों की रिपोर्ट जिला प्राधिकरण को भेजनी होती है।
- रिपोर्ट में देरी या गड़बड़ी जांच का आधार बनती है।
नियम उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई
- पहली गलती पर भी केंद्र सील किया जा सकता है।
- रेडियोलॉजिस्ट का मेडिकल रजिस्ट्रेशन सस्पेंड हो सकता है।
- ₹50,000 से ₹1 लाख तक का जुर्माना, दोहराए जाने पर सजा बढ़ती है।
- टेक्नीशियन द्वारा स्कैन कराना या बिना डॉक्टर की मौजूदगी मशीन चलाना भी अपराध।
जिला प्रशासन की भूमिका
- नियमित निरीक्षण
- फॉर्म-F और मशीन रिकॉर्ड की जांच
- संदेहास्पद मामलों पर स्पॉट वेरिफिकेशन
- जनजागरण अभियान चलाकर भ्रूण लिंग जांच पर रोक
अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने और चलाने की प्रक्रिया सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि एक कड़ी कानूनी जिम्मेदारी है। नियम पालन के बिना सेंटर संचालित करना न केवल अवैध है, बल्कि समाज के संवेदनशील संतुलन को भी प्रभावित करता है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इन केंद्रों पर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। साथ ही गलत करने वालों पर कड़ी निगरानी और सरकार का निर्देश है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर सख्त कार्रवाई होगी।

