मधुपुर सील कोठी की जमीन पर निसान ग्रुप कंपनी द्वारा बोर्ड लगाए जाने पर सोशल मीडिया में विवाद तेज
Madhupur News: मधुपुर शहर में सील कोठी की जमीन एक बार फिर सोशल मीडिया पर विवादों में है। हाल ही में इस जमीन पर निसान ग्रुप कंपनी द्वारा एक बड़ा बोर्ड लगाए जाने के बाद सोशल मीडिया में हलचल तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब जमीन को लेकर वर्षों से मामला विवादित है, तो किसी कंपनी द्वारा बोर्ड लगाना कैसे उचित है?
सूत्रों के अनुसार, सील कोठी की जमीन को लेकर लंबे समय से स्वामित्व विवाद चल रहा है। इसी बीच निसान ग्रुप का बोर्ड लगने से सोशल मीडिया पर में चर्चा जोर पर है।
सोशल मीडिया में उठ रहे प्रमुख सवाल:
- क्या कंपनी के पास जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज हैं?
- क्या प्रशासन की अनुमति से बोर्ड लगाया गया है?
- विवादित जमीन पर किसी भी निजी गतिविधि की इजाजत क्यों दी जा रही है?
- क्या जमीन का केस अब भी कोर्ट में लंबित है?
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब तक जमीन विवाद पूरी तरह सुलझ नहीं जाता, किसी भी कंपनी, संस्था या व्यक्ति द्वारा बोर्ड लगाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए, ताकि शहर में अफवाह और तनाव की स्थिति न बने।
फिलहाल, सील कोठी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है और सभी की नजरें प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर चर्चाएं जारी हैं और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही इस मामले पर स्पष्ट रुख पेश करेगा।
किसी भी कंपनी, संस्था या व्यक्ति को किसी जमीन पर बोर्ड लगाने से पहले कुछ कानूनी और प्रशासनिक आवश्यकताओं का पूरा होना जरूरी है
1. जमीन का वैध स्वामित्व
-
जमीन का खाता–खतियान, रसीद, रजिस्ट्री, खेवट/खतौनी, म्यूटेशन आदि दस्तावेज।
-
यदि जमीन खरीदी गई है तो रजिस्टर्ड सेल डीड।
-
यदि कंपनी है, तो कंपनी के नाम ट्रांसफर/म्यूटेशन।
2. भूमि उपयोग और श्रेणी की पुष्टि
-
जमीन किस श्रेणी की है — सरकारी, निजी, रेलवे, वन विभाग, नगर परिषद, या अन्य विभाग की।
-
यदि सरकारी/किसी विभाग की है तो अनुमति के बिना बोर्ड नहीं लगाया जा सकता।
3. प्रशासन या विभाग की अनुमति
-
कई मामलों में जमीन निजी होने पर भी बोर्ड लगाने के लिए:
-
नगर परिषद/नगर पालिका की NOC
-
राजस्व विभाग से पुष्टि
-
स्थानीय थाने को सूचना
की आवश्यकता होती है।
-
4. जमीन का सीमा निर्धारण
-
संबंधित भूखंड की सीमा का मापन (DCLR/CO/Revenue Surveyor) द्वारा सत्यापन।
-
यह सुनिश्चित करना कि बोर्ड किसी दूसरे की जमीन पर न पड़ रहा हो।
5. विवाद-मुक्त जमीन (No Legal Dispute Certificate)
-
यदि जमीन विवादित है, कोर्ट केस चल रहा है, या स्वामित्व स्पष्ट नहीं है, तो बोर्ड लगाना अवैध माना जा सकता है।
इन सभी मामलों में RERA की मंजूरी और रजिस्ट्रेशन कानूनी रूप से जरूरी है।
-
मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग
-
अपार्टमेंट प्रोजेक्ट
-
कमर्शियल मार्केट/कॉम्प्लेक्स
-
हाउसिंग प्रोजेक्ट (8 से ज्यादा यूनिट)
-
500 sqm से बड़ी जमीन पर कोई भी डेवलपमेंट
RERA क्यों जरूरी है?
-
खरीदारों को सुरक्षा
-
पैसे का सही उपयोग
-
समय पर फ्लैट/घर की डिलीवरी
-
बिल्डरों द्वारा धोखाधड़ी रोकना
-
पारदर्शी रियल एस्टेट सिस्टम बनाना

