मधुपुर में अधूरा ओवर ब्रिज भी बनता जा रहा है शहर में बढ़ रहे सड़क दुर्घटनाओं के खतरे का एक कारण
स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि मधुपुर के डाल्मिया कूप के पास निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का काम राज्य सरकार द्वारा अड़चनें डालने के कारण अधूरा पड़ा है। भू-अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाएँ पूरी नहीं हो पाई।
शहर में लंबे समय से अधूरा पड़ा ओवर ब्रिज अब हादसों का कारण बनता जा रहा है। निर्माण कार्य आधे में रुक जाने के कारण ब्रिज के आसपास की सड़कों पर जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है। आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहनों के बीच टक्कर की घटनाएँ हो रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और ठेकेदार की लापरवाही के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ओवर ब्रिज का काम कई सालो से रुका हुआ है, जिससे राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द ओवर ब्रिज का काम पूरा करवाने की मांग की है ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और आवागमन सुचारु हो सके। साथ ही लोगों का कहना है ये ओवर ब्रिज कब बनेगे न ही सरकार न ही ठेकेदार टाइम लाइन बता रहे हैं।
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के अनुसार
स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि मधुपुर के डाल्मिया कूप के पास निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज का काम राज्य सरकार द्वारा अड़चनें डालने के कारण अधूरा पड़ा है। भू-अधिग्रहण और अन्य प्रक्रियाएँ पूरी नहीं हो पाई।
जिम्मेदार कौन?
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ठेकेदार / निर्माण एजेंसी — यदि निर्माण कर रही एजेंसी ने काम पूरा नहीं किया, सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए, साइट सुरक्षित नहीं रखी।
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भू-अधिग्रहण/लैंड रिलेटेड एजेंसियाँ — यदि भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ, तो काम अधूरा पड़ेगा और लोगों को जोखिम रहेगा। मधुपुर मामले में अधिग्रहण में बाधा बताई गई है।
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स्थानीय प्रशासन / रक्षा तकनीकी निरीक्षण — निर्माण का निरीक्षण, सुरक्षा मानकों की जांच तथा समय-समय पर सुरक्षा चेतावनियाँ लगाना इनकी ज़िम्मेदारी होती है।
एक तरफ दिवाली की जगमहाहट, दूसरी तरफ राजेश के घर में अँधेरा
मधुपुर शहर में दीपवाली के दिन चाँदडीह निवासी राजेश साह की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, एक तरफ जहाँ दिवाली की जगमहाहट थी वही मृतक के परिवार में अँधेरा छा गया। शहर में आये दिन दुर्घटना देखने को मिल रहा है। तेज रफ़्तार में बाइक से चलने वाले युवा, ट्रेक्टर चालक, भारी वाहन एवं इ रिक्शा चालकों ने शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को उलझा कर रख दिया है।
शांति समिति की बैठक में केवल बड़ी बड़ी बातें
मधुपुर में शांति समिति की बैठक में एक तरफ बड़ी बड़ी बातें होती हैं, वही दूसरी तरफ दुर्गा पूजा, काली पूजा एवं छठ पूजा जैसे त्योहारों में प्रशासन की लापरवाही कई सवाल खड़े कर रहे है। बैंक डकैती, चोरी, छिनतई, समेत डी जे से लेकर मारगोमुण्डा में रोड एक्सीडेंट आदि कई घटनाओं से प्रशासन की पोल खुल रही है।
झारखण्ड में पुलिस और आपदा प्रबंधन: कुल बजट का 6.82%
झारखंड के 2025-26 बजट में, सुरक्षा के लिए कोई अलग से विशिष्ट राशि का उल्लेख नहीं है, लेकिन पुलिस एवं आपदा प्रबंधन को कुल बजट का 6.82% आवंटित किया गया है, जो लगभग 10,000 करोड़ रुपये के बराबर है। इसके बावजूद भी जनता की सुरक्षा में आये दिन चूक क्यों ? प्रशासन पर सवाल उठना लाज़मी है और इस विषय पर चिंतन भी जरुरी हैं।
झारखंड के 2025-26 बजट में सीधे तौर पर "सड़क सुरक्षा" के नाम पर कोई विशेष आवंटन नहीं
झारखंड के बजट में सीधे तौर पर "सड़क सुरक्षा" के नाम पर कोई विशेष आवंटन नहीं बताया गया है, लेकिन राज्य सरकार के विस्तृत बजट में यातायात और परिवहन के समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 2025-26 के बजट में कुल 1,36,653 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है, जिसमें से एक हिस्सा परिवहन और संबंधित क्षेत्रों के लिए आवंटित किया जाएगा, हालांकि सड़क सुरक्षा के लिए अलग से राशि का उल्लेख नहीं है।

