फुटपाथ दुकानदारों पर एकतरफा कार्रवाई, फिर वेंडर लाइसेंस क्यों ?
Madhupur News: मधुपुर शहर में फुटपाथ दुकानदारों के खिलाफ चल रही संभावित कार्रवाई और ‘अतिक्रमण’ के नाम पर उठ रही मांगों से स्थानीय छोटे व्यापारियों में नाराज़गी बढ़ रही है। शहर के मुख्य बाज़ार, स्टेशन रोड, नगर पालिका रोड और सब्ज़ी मंडी क्षेत्र में वर्षों से अपनी रोज़ी-रोटी चलाने वाले इन दुकानदारों का कहना है कि उनके बिना शहर की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था अधूरी है।
कई कमर्शियल बिल्डिंग के निचे पार्किंग होने के बाद भी उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हो रहा है?
कई ऐसे कमर्शियल बिल्डिंग है जिसके निचे पार्किंग होने के बाद भी उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है बल्कि पार्किंग को भी भाड़े पर लगा रखा है, और हम फुटपाथ पर रोजगार कर जीवन यापन करने वालों को उजड़ा जा रहा है। प्रशासन गरीबों के साथ ही अन्ययाय करती है बड़े बिल्डिंग वालों के खिलाफ प्रशासन का कोई एक्शन देखने को नहीं मिलता है।
फुटपाथी दुकानदारों का कहना है अगर हम गुनहगार हैं तो फिर वेंडर लाइसेंस क्यों ?
मधुपुर शहर में नगर परिषद् के द्वारा फुटपाथी दुकानदारों का वेंडर लाइसेंस बनाया गया है, दुकानदारों ने सवाल उठाया है अगर हम गुनाहगार है तो फिर वेंडर लाइसेंस का क्या मतलब है। मधुपुर में प्रशासन की दोहरी निति से दुकानदार परेशान है।
रोज़ी-रोटी पर संकट
दुकानदारों का कहना है कि वे किसी शौक से फुटपाथ पर दुकान नहीं लगाते, बल्कि मजबूरी में अपने परिवार का पेट पालने के लिए यहां व्यापार करते हैं। “यदि फुटपाथ से हमें हटा दिया गया, तो हमारे बच्चों की पढ़ाई और जीवनयापन कैसे चलेगा?”
व्यावसायिक भवनों और अव्यवस्थित पार्किंग पर सवाल
दुकानदारों का कहना है कि जाम की असली वजह वे नहीं, बल्कि बड़े व्यावसायिक भवनों के पास की अव्यवस्थित पार्किंग और मनमाने ढंग से खड़े किए जाने वाले वाहन हैं। “हम छोटी-छोटी दुकानें लगाते हैं। असली समस्या व्यावसायिक भवनों के सामने बनाई गई अवैध पार्किंग और चारपहिया वाहनों की लाइन है।
जनता को सुविधा वही देती है—फुटपाथ बाजार
कई स्थानीय लोग मानते हैं कि फुटपाथ बाजार से उन्हें
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किफ़ायती दाम में सामान मिलता है,
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रोज़मर्रा की चीजें आसानी से उपलब्ध होती हैं,
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और शहर की आर्थिक गतिविधि जीवित रहती है।
बाज़ार में जीवंतता और छोटे व्यापारियों की भागीदारी ही शहर की पहचान है।
दुकानदारों की मांग: समाधान निकले, रोज़गार न छीना जाए
फुटपाथ दुकानदार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि—
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उन्हें हटाने के बजाय व्यवस्थित तरीके से स्थान आवंटित किया जाए,
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छोटे व्यापारियों को वैकल्पिक सुरक्षित ज़ोन दिया जाए,
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पार्किंग व्यवस्था सुधारकर जाम कम किया जाए,
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और उनके व्यवसाय को संरक्षण दिया जाए।
दुकानदारों का कहना है कि “सरकार जब रोज़गार देने की बात करती है, तो छोटे व्यापारियों को उजाड़ना समाधान नहीं हो सकता।”

