MSME और बड़े उद्योगों के बीच झूलता झारखंड, रोजगार की दौड़ जारी

Nov 21, 2025 - 23:02
Nov 21, 2025 - 09:36
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MSME और बड़े उद्योगों के बीच झूलता झारखंड, रोजगार की दौड़ जारी
AI के द्वारा बनाई गई तस्वीर

झारखंड में उद्योगों के विस्तार से बढ़ी संभावनाएँ, लेकिन रोजगार सृजन को लेकर चुनौतियाँ बरकरार

झारखंड अपनी खनिज संपदा और औद्योगिक आधार के कारण देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में गिना जाता है। यहां कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, बिजली उत्पादन, सीमेंट, खाद्य प्रसंस्करण और MSME सेक्टर में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित हैं। हाल के वर्षों में राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति, सिंगल-विंडो सिस्टम और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। इसके बावजूद रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना अब भी राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।


बड़े उद्योगों का विस्तार, पर स्थानीय रोजगार में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं

झारखंड में टाटा स्टील, सेल, CCL, BCCL, HEC, NTPC जैसे बड़े उद्योग वर्षों से कार्यरत हैं। इसके अलावा पावर और इस्पात क्षेत्रों में कई नई परियोजनाएँ शुरू हुई हैं।

मुख्य बिंदु:

  • भारी उद्योगों से राज्य को बड़ी मात्रा में राजस्व और उत्पादन क्षमता मिलती है

  • लेकिन स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सीमित स्तर पर ही बढ़ा है

  • कंपनियों में तकनीकी पदों पर अधिकतर बाहर के प्रशिक्षित लोग भर्ती किए जाते हैं

  • स्किल डेवलपमेंट की कमी भी नौकरी प्राप्ति में बाधा

स्थानीय संगठनों का कहना है कि CSR और रोजगार नीतियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


MSME और स्टार्ट-अप सेक्टर बना नई उम्मीद

छोटे और मध्यम उद्योग तथा स्टार्ट-अप मॉडल तेजी से बढ़ रहे हैं।
राज्य सरकार की स्टार्ट-अप पॉलिसी और MSME क्लस्टर योजना ने सकारात्मक बदलाव दिखाए हैं।

लाभ:

  • स्थानीय उत्पादों — तसर, लाह, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण — का विस्तार

  • छोटे उद्योगों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

  • युवाओं का स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर रुझान

चुनौतियाँ:

  • वित्त (फंडिंग) तक सीमित पहुंच

  • टेक्निकल ट्रेनिंग की कमी

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली–सड़क जैसी अवसंरचना समस्याएँ


आदिवासी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास की गति धीमी

राज्य के आदिवासी बहुल जिलों — संथाल परगना, पश्चिमी सिंहभूम, गुमला, खूंटी — में उद्योग सीमित हैं।
यहाँ जमीन अधिग्रहण, जन आंदोलनों, और सामाजिक-पर्यावरणीय चिंताओं के कारण निवेश की गति धीमी है।

स्थानीय समुदायों का कहना है कि—

  • उद्योग स्थापित हों, लेकिन विस्थापन कम हो

  • रोजगार पहले स्थानीय युवाओं को मिले

  • CSR से स्वास्थ्य, शिक्षा और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएँ बेहतर हों


इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से उद्योगों को मिलेगी रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में निवेश बढ़ाने के लिए बुनियादी ढाँचे (Infrastructure) को और मजबूत करना आवश्यक है:

  • तेज इंटरनेट और डिजिटल सेवाएँ

  • नई सड़क परियोजनाएँ व रेल कनेक्टिविटी

  • औद्योगिक क्षेत्रों में स्थायी बिजली आपूर्ति

  • लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग का विस्तार

ये पहलें उद्योगों को आकर्षित करेंगी और राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार बढ़ा सकती हैं।


रोजगार की स्थिति: उम्मीदें और चुनौतियाँ दोनों

  • उद्योगों के आने से अप्रत्यक्ष रोजगार में वृद्धि होती है — परिवहन, ठेका, खान, सफाई, खाद्य-सप्लाई जैसे क्षेत्रों में

  • लेकिन नैदानिक तकनीकी कौशल की कमी के कारण हाई-स्किल नौकरियों में स्थानीय युवाओं की भागीदारी कम है

  • राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रमों से स्थिति सुधर रही है, लेकिन गति धीमी है

युवाओं की सबसे बड़ी मांग है—
“स्थानीय आवश्यकता के अनुसार स्किल सेंटर और उद्योग-आधारित प्रशिक्षण।”


निष्कर्ष: समृद्धि और रोजगार के बीच संतुलन बनाने की जरूरत

झारखंड में उद्योग स्थापित करने की संभावनाएँ बेहद मजबूत हैं।
लेकिन यह तभी लाभकारी होगा जब—

  • स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित हो

  • उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन बने

  • आदिवासी व ग्रामीण समुदायों को योजना के केंद्र में रखा जाए

  • MSME और स्टार्ट-अप को अधिक सहयोग मिले

राज्य के विकास की असली दिशा तभी बदलेगी जब औद्योगिक प्रगति के साथ व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।