झारखंड में भ्रष्टाचार की बढ़ती चुनौतियाँ, कानूनी सुधारों की मांग तेज
झारखंड में भ्रष्टाचार लंबे समय से विकास कार्यों की रफ्तार को धीमा करता आया है। चाहे वह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बात हो, खनन क्षेत्र में अनियमितताएँ हों या फिर स्थानीय निकायों में पारदर्शिता का सवाल—अक्सर भ्रष्टाचार के मामलों ने लोगों को निराश किया है। हाल के महीनों में राज्य के कई विभागों में हुई शिकायतों ने एक बार फिर यह मुद्दा सुर्खियों में ला दिया है।
सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें
ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, पेयजल परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें बढ़ रही हैं। कई योजनाएँ कागज़ों में पूरी दिखती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजनाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी की जरूरत है।
खनन क्षेत्र में पारदर्शिता का सवाल
झारखंड का खनन क्षेत्र हमेशा से विवादों में रहा है। अवैध खनन, रॉयल्टी में गड़बड़ी, और तस्करी की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खनन सेक्टर में तकनीक-आधारित निगरानी प्रणाली और सख्त कानून लागू करने की जरूरत है।
कानूनी सुधारों पर बढ़ती मांग
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए राज्य में कानूनी सुधारों की मांग तेज हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई संगठनों का कहना है कि—
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लोकायुक्त संस्था को और अधिक शक्तियाँ दी जानी चाहिए
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सरकारी विभागों में ई-गवर्नेंस को अनिवार्य किया जाए
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फाइलों और भुगतान की ट्रैकिंग सिस्टम को सार्वजनिक किया जाए
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भ्रष्टाचार के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतें गठित हों
सरकार की पहल
राज्य सरकार समय-समय पर भ्रष्टाचार-रोधी कदमों की घोषणा करती रही है। डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने, टेंडर प्रणाली को पारदर्शी बनाने और शिकायत समाधान पोर्टल को सक्रिय करने जैसी पहलें की गई हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इन प्रयासों को मजबूत और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की जरूरत है।
जनता की उम्मीदें
आम जनता का कहना है कि जब तक भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक विकास की राह आसान नहीं होगी। लोग चाहते हैं कि कानून व्यवस्था मजबूत हो, दोषियों पर समयबद्ध कार्रवाई हो और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़े।

