मानवता शर्मसार: कड़ाके की ठंड में सड़क किनारे सोने को मजबूर वृद्ध श्यामलाल
Madhupur News: कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। वृद्ध श्यामलाल बीती रात सड़क किनारे खुले आसमान के नीचे सोते मिले। तापमान लगातार गिर रहा है, लेकिन इसके बावजूद श्यामलाल को राहत या सहारा कहीं से मिलता नहीं दिखा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, श्यामलाल पिछले कई दिनों से रेड क्रॉस सोसाइटी के सामने मुख्य रोड किनारे एक फटे हुए कंबल के सहारे रात गुज़ार रहे हैं। गर्म कपड़ों और भोजन की व्यवस्था भी न के बराबर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार सूचना देने के बावजूद प्रशासन या सामाजिक संगठनों की ओर से कोई ठोस मदद नहीं पहुंची।
ठंड में जीवन-मरण की लड़ाई
रात का तापमान धीरे धीरे गिरते जा रहा है। ऐसे में सड़क पर सोना किसी खतरे से कम नहीं। श्यामलाल ने बताया कि उनके पास रहने के लिए न घर है, न ही परिवार का सहारा। मजबूरी में सड़क को ही अपना आसरा बना लिया है।
झारखंड में बुजुर्गों की स्थिति पर सवाल और सरकार के दावे खोखले
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 'रैन बसेरों' और ‘बेघर लोगों को ठंड से बचाने’ के सरकारी दावों की पोल एक बार फिर खुलती नज़र आ रही है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मदद न मिली तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों की मांग
– प्रशासन तत्काल श्यामलाल को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराए
– मेडिकल टीम भेजकर वृद्ध की स्वास्थ्य जांच कराई जाए
– इलाके में रैन बसेरों की वास्तविक स्थिति की जांच हो
मानवता की पुकार
बुजुर्ग श्यामलाल की स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि विकास और योजनाओं के बीच क्या हम अब भी कमजोर वंचित नागरिकों को भूलते जा रहे हैं? यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही का आईना है।

