अनुमंडल अस्पताल मधुपुर: निजी सेंटर से सरकारी अस्पताल का MOU सवालों के घेरे में, बिना रेडियोलॉजिस्ट के तकनीशियन के सहारे चल रही जांच
मधुपुर: शहर में सरकारी अस्पताल द्वारा निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर से किए गए MOU (अनुबंध) पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सरकारी अस्पताल ने जिस निजी संस्थानों से समझौता किया है, वहाँ नाम मात्र का रेडियोलॉजिस्ट दिखाया गया है, जबकि असली संचालन तकनीशियन के भरोसे चल रहा है।
सरकारी अस्पताल ने निजी केंद्र से किया MOU — लेकिन विशेषज्ञ मौजूद नहीं
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि—
सरकारी अस्पताल ने अल्ट्रासाउंड सेवाओं के लिए एक प्राइवेट सेंटर से MOU किया।
MOU में दर्ज रेडियोलॉजिस्ट मौके पर कभी उपलब्ध नहीं रहते।
सरकारी अस्पताल उनकी उपलब्धता मानकर सेवाएँ जारी रखता है।
पूरा संचालन सिर्फ तकनीशियन चला रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।
यह स्थिति सरकारी अस्पताल की जवाबदेही और सरकार–निजी गठजोड़ पर सवाल खड़ा करती है।
MOU की शर्तें क्या कहती हैं?
MOU के तहत—
निजी केंद्र को योग्य, पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
सरकारी अस्पताल को उनकी उपस्थिति की सत्यापन रिपोर्ट रखनी चाहिए।
MOU तभी वैध रहता है जब केंद्र कानूनी मानकों का पालन करे।
लेकिन मधुपुर में इन शर्तों का पालन कागज़ों तक ही सीमित बताया जा रहा है।
तकनीशियन के सहारे चल रहा पूरा सिस्टम
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के अनुसार—
अल्ट्रासाउंड व सोनोग्राफी तकनीशियन के द्वारा की जा रही है।
रिपोर्ट भी तकनीशियन के स्तर पर तैयार हो रही है।
रेडियोलॉजिस्ट का सिर्फ नाम रखा गया है ताकि MOU चालू रहे।
यह PCPNDT एक्ट का संभावित उल्लंघन है।
क्यों बढ़ रहे हैं सवाल?
नागरिकों और स्वास्थ्य कर्मियों में नाराजगी बढ़ी है, क्योंकि—
गलत रिपोर्ट की आशंका अधिक
गर्भवती महिलाओं व गंभीर मरीजों की सुरक्षा खतरे में
सरकारी अस्पताल की विश्वसनीयता पर आंच
प्राइवेट सेंटर को अनुबंध का लाभ, जिम्मेदारी शून्य एक स्थानीय नागरिक ने बताया—
“सरकारी अस्पताल ने निजी सेंटर से MOU किया, लेकिन विशेषज्ञ आते ही नहीं। जांच पूरी तरह तकनीशियन चला रहे हैं। यह जनता की जान से खिलवाड़ है।”
अस्पताल प्रबंधन समिति पर भी सवाल
आरोप है कि—
समिति निरीक्षण नहीं कर रही
उपस्थिति रजिस्टर और योग्यता प्रमाणपत्र की जाँच अनियमित
निजी केंद्र को संरक्षण देने के आरोप भी सामने आ रहे हैं
जांच की मांग तेज
अब स्थानीय संगठनों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि—
MOU की शर्तों का पुन: परीक्षण किया जाए
रेडियोलॉजिस्ट की वास्तविक उपस्थिति की जांच हो
तकनीशियन-चालित जांच पर तुरंत रोक लगे
अगर नियमों का उल्लंघन मिले तो MOU रद्द कर कार्रवाई की जाए
सेंटर्स में लगे सीसीटीवी की गहन जांच हो

