मधुपुर में गायब हो गई 19वीं सदी की धरोहर?

Dec 27, 2025 - 11:56
Dec 27, 2025 - 11:55
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मधुपुर में गायब हो गई 19वीं सदी की धरोहर?

मधुपुर: मधुपुर शहर की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा दत्ता चैरिटेबल अस्पताल, जिसे स्थानीय लोग 19वीं सदी का सामाजिक-चिकित्सीय धरोहर बताते हैं, आज अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है। कभी जरूरतमंदों के लिए सेवा का केंद्र रहा यह अस्पताल अब न तो अपने मूल स्वरूप में दिखता है और न ही इसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर कोई स्पष्ट सरकारी रिकॉर्ड सामने है।

स्थानीय बुजुर्गों और समाजसेवियों के अनुसार, ब्रिटिश काल के दौरान स्थापित यह अस्पताल मधुपुर के शुरुआती स्वास्थ्य संस्थानों में से एक था, जहां गरीबों और असहायों का निःशुल्क इलाज किया जाता था। बताया जाता है कि दत्ता परिवार द्वारा स्थापित यह अस्पताल वर्षों तक क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बना रहा।

इतिहास धुंधला, दस्तावेज नदारद

आज स्थिति यह है कि अस्पताल का मूल भवन जर्जर अवस्था में है, जबकि इसके स्थापना वर्ष, संस्थापक और ऐतिहासिक दर्जे को लेकर कोई पुख्ता सरकारी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। न तो इसे किसी राज्य या जिला स्तरीय धरोहर सूची में शामिल किया गया और न ही इसके संरक्षण की ठोस पहल दिखाई देती है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि- 

“अगर यह अस्पताल सच में 19वीं सदी का है, तो यह मधुपुर ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड की धरोहर है। प्रशासन की उदासीनता के कारण एक ऐतिहासिक संस्था धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।”

संरक्षण की उठी मांग

समाजसेवियों ने मांग की है कि—

  • दत्ता चैरिटेबल अस्पताल के इतिहास की आधिकारिक जांच कराई जाए
  • पुराने दस्तावेज़ों, अभिलेखों और स्थानीय साक्ष्यों के आधार पर ऐतिहासिक दर्जा तय किया जाए
  • यदि यह विरासत सिद्ध होती है, तो इसे संरक्षित धरोहर घोषित कर पुनर्जीवित किया जाए

प्रशासन की चुप्पी

इस पूरे मामले में अब तक जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। सवाल यह है कि क्या मधुपुर एक और ऐतिहासिक धरोहर को यूँ ही खो देगा, या समय रहते इसे बचाने की पहल होगी?