मधुपुर में नियम को ताक पर रखकर चल रहे बीयर बार, प्रशासन की अनदेखी पर सवाल
मधुपुर: शहर में शराब और बीयर बारों के संचालन को लेकर प्रशासन की सख्त गाइडलाइन होने के बावजूद कई बार नियमों को ताक पर रखकर संचालित किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कई बीयर बार बिना तय परमिट, समय सीमा और लाइसेंस शर्तों का पालन किए खुलेआम व्यवसाय कर रहे हैं, जिससे कानून व्यवस्था और सामाजिक माहौल पर असर पड़ रहा है।
क्या तय मानकों के अनुसार है संचालन?
सूत्रों के अनुसार, मधुपुर शहर के विभिन्न इलाकों में कई बीयर बार फायर सेफ्टी नो-ऑब्जेक्शन, हेल्थ एवं स्वच्छता प्रमाणपत्र, एक्साइज नियमों का पालन किए बिना ही चल रहे हैं। कुछ स्थानों पर तो निर्धारित समय सीमा के बाद भी देर रात तक शराब परोसे जाने की शिकायतें मिल रही हैं।
रिहायशी इलाकों में संचालित होने की शिकायत
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ बीयर बार रिहायशी मोहल्लों के पास चल रहे हैं, जो एक्साइज विभाग की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों और परिवारों सहित आम नागरिकों को असुविधा हो रही है।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
नियमों के उल्लंघन के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक किसी बड़े अभियान या छापेमारी की खबर नहीं आई है। इससे शहरवासियों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन इन अनियमितताओं से अनजान है या फिर जानकर भी कार्रवाई नहीं कर रहा?
स्थानीय लोग कर रहे कार्रवाई की मांग
शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने जिला प्रशासन तथा उत्पाद विभाग से मांग की है कि नियम विरुद्ध चल रहे बीयर बारों की जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए, ताकि शहर में कानून व्यवस्था और सामाजिक माहौल को बेहतर बनाया जा सके।
1. उत्पाद एवं संचालन नियमावली 2025
झारखंड ने “उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग” की नई नियमावली जारी की है — झारखंड उत्पाद (मदिरा की खुदरा बिक्री हेतु दुकानों की बंदोबस्ती एवं संचालन) नियमावली 2025
यह नीति 1 सितम्बर 2025 से प्रभावी हुई है
2. लाइसेंस प्रकार
होटल / रेस्टोरेंट / बार / क्लब के लिए विशेष लाइसेंस होते हैं जिसे उन्हें “प्रोपर लाइसेंस” के रूप में लेना पड़ता है।
इसके अलावा माइक्रो ब्रूवरी लाइसेंस (Micro Brewery) भी है, जिसमें बीयर बनाने और उसी स्थान पर परोसने के नियम हैं।
यदि कोई प्राइवेट पार्टी (जैसे शादी, रिसेप्शन) हो और शराब परोसी जाए, तो वहाँ टेम्पररी बार लाइसेंस लेना जरूरी है।
3. शुल्क और दस्तावेज़
लाइसेंस के लिए आवश्यक दस्तावेज़ों में शामिल हैं: पहचान, पता, बिज़नेस का रजिस्ट्रेशन, प्रॉपर्टी का लेआउट, No Objection Certificates (NOC) आदि।
लाइसेंस फीस में शराब की प्रकार के हिसाब से अलग दरें हैं—for example, बीयर पर विशेष फीस होती है।
“Bar Transport Fee” नाम का शुल्क भी है। यह झारखंड उत्पाद अधिनियम की नियमावली में निर्दिष्ट है।
4. माइक्रो ब्रूवरी संचालन नियम
माइक्रो ब्रूवरी में जो बीयर बनती है, उसका अल्कोहल कंटेंट सामान्यतः 8% v/v से अधिक नहीं हो सकता।
ब्रूवरी परिसर को स्वच्छ, वेंटिलेशन वाला होना चाहिए, और बीयर परोसे जाने वाले ग्लास, डिस्पेंसिंग सिस्टम आदि की हाइजीन पर ध्यान देना अनिवार्य है।
बीयर सिर्फ उसी लाइसेंस वाले स्थान (ब्रूवरी से सम्बद्ध बार / क्लब) पर परोसी जा सकती है; उसे बाहर रिटेल के लिए बेचना नहीं हो सकता माइक्रो ब्रूवरी लाइसेंस के तहत।
माइक्रो ब्रूवरी में बीयर सर्विंग का समय भी नियम में तय है: 10:00 AM से 11:00 PM तक।
5. निगरानी और अनुपालन
एक्साइज विभाग (Department of Excise & Prohibition) यह सुनिश्चित करता है कि लाइसेंसधारी नियमों का पालन करें।
लेबल पंजीकरण और मूल्य निर्धारण के लिए भी नियम हैं — हर शराब की बोतल पर लेबल पंजीकृत होना चाहिए।
नियमों का उल्लंघन होने पर दण्ड (penalties) हो सकते हैं — जैसे अवैध सर्विंग, लाइसेंस न लेना आदि।

