मधुपुर विधानसभा: विकास के वादों और जमीनी हकीकत के बीच फंसा जनमानस

Nov 22, 2025 - 12:01
Nov 22, 2025 - 19:09
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मधुपुर विधानसभा: विकास के वादों और जमीनी हकीकत के बीच फंसा जनमानस
AI के द्वारा बनाई गई तस्वीर

मधुपुर विधानसभा: देवघर जिला की अहम राजनीतिक इकाई मधुपुर विधानसभा इस समय क्षेत्रीय विकास, जनसुविधाओं और राजनीतिक सक्रियता को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। संथाल परगना का यह महत्वपूर्ण क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क निर्माण, जल-निकासी और नगर प्रबंधन जैसी कई मूलभूत जरूरतों से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

विकास के दावे और जमीनी सच्चाई

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मधुपुर में कई परियोजनाएँ वर्षों से अधूरी पड़ी हैं।

शहर में सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी देखने को मिल रहा है, वही कई ग्रामीण इलाकों तक सड़क अभी नहीं पहुंची है जिससे आवागमन प्रभावित रहता है।

नगर परिषद के अंतर्गत नाली सफाई व्यवस्था, जल-निकासी और स्ट्रीट लाइट की समस्या अभी भी समाधान की प्रतीक्षा में है।

स्वास्थ्य सेवाएँ भी सीमित संसाधनों पर टिकी हैं। अल्ट्रासाउंड सेंटर, निजी क्लीनिक और अस्पतालों की मॉनिटरिंग पर सवाल उठते रहे हैं।

लाओ पाला आर जी लिमिटेड बंद होने के कगार पर है, उद्योग धंधा जमीन की स्थानीय नीति के वजह से लगाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है एवं शिक्षा और युवाओं के रोजगार को लेकर भी स्थानीय युवाओं में असंतोष देखा जा रहा है।

राजनीतिक माहौल

मधुपुर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही क्षेत्र के विकास को लेकर तीखे आरोप-प्रत्यारोप में लगे हैं।

जन मुद्दों पर राजनीतिक पार्टियाँ सक्रिय तो दिखती हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि विकास कार्यों की गति अपेक्षाकृत धीमी है।

स्थानीय नागरिकों की मांगें

सड़क, नाली और जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करना

मधुपुर स्टेशन और शहर में ट्रैफिक मैनेजमेंट की समस्या का समाधान

अस्पतालों/क्लीनिकों की मॉनिटरिंग और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण केंद्र

नगर पंचायत में पारदर्शी कार्य प्रणाली

जल संकट (Water Crisis):

वादे: शहरी जलापूर्ति योजनाओं को शुरू करने और पूरा करने के वादे किए गए।

हकीकत: पुरानी जलापूर्ति योजना काफी हद तक विफल रही है और केवल कुछ ही मोहल्लों तक सीमित है। करोड़ों की लागत वाली नई शहरी जलापूर्ति योजना भी समय पर पूरी नहीं हो पाई है, जिससे 55 हज़ार की आबादी को नियमित पानी की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।

रोजगार और पलायन (Employment and Migration):

वादे: युवाओं को रोजगार देने और क्षेत्र के विकास के माध्यम से पलायन रोकने की बातें होती हैं।

हकीकत: बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार की तलाश में अन्य शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है।

पर्यटन (Tourism):

वादे: इको और विलेज टूरिज्म को बढ़ावा देने के वादे किए गए थे।

हकीकत: ये परियोजनाएं अभी भी धरातल पर पूरी तरह से नहीं उतर पाई हैं।

विधानसभा में बढ़ती लोगों की उम्मीदें

राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए मधुपुर के लोग इस बार अपने जनप्रतिनिधि से उम्मीद कर रहे हैं, जो क्षेत्र की मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता दे और अधूरे कामों को पूरा कराए। जनता का कहना है कि विकास के मुद्दे प्रमुखता से उठने चाहिए, न कि सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित रहें।