मधुपुर में बेजुबान स्ट्रीट डॉग की पीड़ा, जो रातों को हमारी पहरेदारी करते हैं
Madhupur News: मधुपुर की सड़कों पर रोज़ एक मूक चीख सुनाई देती है, जिसे कोई सुनना नहीं चाहता। ये वही बेजुबान स्ट्रीट डॉग हैं, जो दिन में भूख, बीमारी और चोट से जूझते हैं और रात में हमारी गलियों, मोहल्लों और घरों की पहरेदारी करते हैं।
जब पूरा शहर सो जाता है, तब यही स्ट्रीट डॉग अंधेरी गलियों में जागकर संदिग्ध गतिविधियों पर भौंकते हैं, चोरी और अपराध की आहट से लोगों को सतर्क करते हैं। सुरक्षा में उनका यह योगदान किसी पुलिस चौकी से कम नहीं, लेकिन बदले में उन्हें मिलता है उपेक्षा, भूख और बेरहमी।
कभी सड़क दुर्घटना में घायल होकर, तो कभी इंसानी क्रूरता का शिकार बनकर, ये बेजुबान घंटों सड़क किनारे तड़पते रहते हैं। उनकी आँखों में दर्द है, शरीर पर जख्म हैं, पर इलाज और मदद के लिए कोई व्यवस्था नहीं।
नगर परिषद और प्रशासन पशु कल्याण, एंटी-रेबीज टीकाकरण और नसबंदी के दावे तो करते हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि न कोई स्थायी शेल्टर है, न रेस्क्यू टीम और न ही घायल जानवरों के लिए आपात चिकित्सा सुविधा।
सबसे दुखद यह है कि कुछ इलाकों में इन कुत्तों के साथ क्रूरता की घटनाएं भी सामने आती हैं। यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि इंसानियत की हार है।
आज सवाल यह है कि जो बेजुबान रात भर हमारी सुरक्षा करते हैं, क्या उन्हें भी जीने और संरक्षण का हक नहीं?
अब समय आ गया है कि मधुपुर की व्यवस्था जागे और इन मूक प्रहरीयों के लिए ठोस कदम उठाए।

