सिंघाड़े एवं चाय की दुकानों से निकल रहे प्रदूषण से वातावरण दूषित, बगल के पेड़ों पर दिखने लगा असर
मधुपुर (झारखंड) शहर के रेड क्रॉस सोसाइटी इलाकों में सिंघाड़ा भूनने और चाय की दुकानों से लगातार निकल रहे धुएं व कचरे से वातावरण दूषित होता जा रहा है। कोयला, लकड़ी और गीले ईंधन के उपयोग से उठने वाला धुआं न केवल हवा की गुणवत्ता को खराब कर रहा है, बल्कि दुकानों के आसपास लगे पेड़ों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव साफ नजर आने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार धुएं की चपेट में रहने से पेड़ों की पत्तियां काली पड़ रही हैं, पत्तों की चमक खत्म हो रही है और कुछ जगहों पर पत्तियां समय से पहले झड़ने लगी हैं। इससे हरियाली प्रभावित हो रही है और क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इस तरह का प्रदूषण पेड़ों की प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) प्रक्रिया को बाधित करता है, जिससे पेड़ों की वृद्धि रुक जाती है। साथ ही, आसपास रहने वाले लोगों को सांस संबंधी बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों ने नगर प्रशासन से मांग की है कि दुकानों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, धुएं के निस्तारण की उचित व्यवस्था की जाए और सार्वजनिक स्थलों पर पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में इसका असर और गंभीर हो सकता है।

