झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था: सुविधाओं की कमी और सुधार की कोशिशों के बीच जूझता तंत्र
झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में अस्पतालों में संसाधनों की दिक्कत, और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का कमजोर नेटवर्क—ये सभी चुनौतियाँ अभी भी राज्य के सामने खड़ी हैं। सरकार की नई योजनाएँ उम्मीद जगाती हैं, पर आम लोगों के लिए वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब ये योजनाएँ जमीनी स्तर पर प्रभावी तौर पर लागू हों।
Jharkhand News: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा अभी भी कई चुनौतियों से घिरा है—जहाँ एक ओर डॉक्टरों और अस्पतालों की कमी लगातार सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार नई योजनाओं और बजट के जरिए सुधार की कोशिशें कर रही है।
प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे बड़ी चुनौती
राज्य में अभी भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और उप-स्वास्थ्य उपकेंद्रों की संख्या आवश्यकता के मुकाबले काफी कम है।
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मौजूदा PHC की संख्या महज़ 291 के आसपास है, जबकि जरूरत 1,000 से अधिक मानी जाती है।
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कई ग्रामीणों को प्राथमिक इलाज के लिए भी 10–15 किमी दूर तक जाना पड़ता है।
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कई उपकेंद्रों में दवाओं, पानी, बिजली और स्टाफ की भारी कमी बनी रहती है।
डॉक्टरों की भारी कमी, विशेषज्ञ लगभग नदारद
राज्य में डॉक्टरों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है।
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झारखंड में औसतन प्रति 4,700–7,000 आबादी पर 1 डॉक्टर उपलब्ध है।
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जिला अस्पतालों में 80% से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद अभी भी खाली हैं।
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कई अस्पतालों में गायनेकोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, सर्जन और पेडियाट्रिशन की भारी कमी है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को रांची, बोकारो या दुमका भेजना पड़ता है।
बेड और इमरजेंसी सुविधाएँ अभी भी कम
हालांकि राज्य में पिछले वर्षों में मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों का विस्तार हुआ है, लेकिन बेड क्षमता अभी भी अपर्याप्त है।
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कई जिला अस्पतालों में ICU व ट्रॉमा सेंटर नहीं हैं।
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ग्रामीण अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट और आधुनिक उपकरणों की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है।
सरकार की नई योजनाएँ: सुधार की दिशा में कदम
2024–25 में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य बजट बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं—
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500-बेड वाले आधुनिक अस्पतालों का निर्माण।
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जिला अस्पतालों को सुपर-स्पेशलिटी सुविधाओं से जोड़ने की योजना।
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1,000 से अधिक नए स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाने की स्वीकृति।
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निजी डॉक्टरों की सेवाएँ ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में लेने की पहल।
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रांची RIMS को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करने का प्लान।
जनता का अनुभव: शहर बनाम गांव
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शहरी क्षेत्रों में निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों की संख्या बढ़ी है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएँ अभी भी बहुत कमजोर हैं।
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कई गाँवों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए रात में समय पर एम्बुलेंस तक नहीं मिल पाती।
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JSSK, आयुष्मान कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ भी समय पर नहीं मिलने से कई गरीब परिवार इलाज से वंचित रह जाते हैं।
झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन जमीन पर स्थितियाँ बताती हैं कि यह अभी भी लंबा सफर है। डॉक्टरों की भारी कमी, अस्पतालों में संसाधनों की दिक्कत, और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का कमजोर नेटवर्क—ये सभी चुनौतियाँ अभी भी राज्य के सामने खड़ी हैं।
सरकार की नई योजनाएँ उम्मीद जगाती हैं, पर आम लोगों के लिए वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब ये योजनाएँ जमीनी स्तर पर प्रभावी तौर पर लागू हों।

